(हिन्दी भाषी राज्यों के विशेष सन्दर्भ में)
सुंदर सिंह (शोधार्थी)
तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,मेरठ
डा. मनोज कुमार श्रीवास्तव (सह आचार्य)
तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
शोध सार: भारत जैसे विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक देश में जनसंपर्क राजनीति का एक अत्यंत प्रभावशाली उपकरण बन चुका है। यह न केवल राजनीतिक दलों को जनता से जोड़ने का माध्यम प्रदान करता है, बल्कि उनके विचारों, नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी संप्रेषण में भी अहम भूमिका निभाता है। यह शोधपत्र भारतीय राजनीति में जनसंपर्क की भूमिका का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत
करता है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों जैसे भारतीय जनता पार्टी एवं क्षेत्रीय दलों जैसे समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस आदि द्वारा अपनाई गई जनसंपर्क रणनीतियों की समीक्षा की गई है।
इस अध्ययन में पारंपरिक जनसंपर्क विधियों (जैसे जनसभाएं, रैलियाँ, पोस्टर आदि) और आधुनिक तकनीकी माध्यमों (जैसे सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन, मोबाइल एप्लिकेशन आदि) के प्रयोग की तुलना की गई है। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि किस प्रकार से जनसंपर्क रणनीतियाँ राजनीतिक दलों की छवि निर्माण, जनमत प्रभावित करने और चुनावी सफलता में सहायक सिद्ध होती हैं। इसके अतिरिक्त, यह शोध यह भी विश्लेषण करता है कि किस प्रकार एक ही विषय पर विभिन्न दलों द्वारा भिन्न-भिन्न जनसंपर्क दृष्टिकोण अपनाए जाते हैं।
बीज शब्द: जनसंपर्क, भारतीय राजनीति, राजनीतिक दल, चुनावी रणनीति, सोशल मीडिया, पारंपरिक जनसंपर्क, छवि निर्माण, मतदाता व्यवहार, तुलनात्मक अध्ययन, डिजिटल प्रचार।
